Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 13.23 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)13.23

13.23
उपद्रष्टानुमन्ता च भर्ता भोक्ता महेश्वरः । परमात्मेति चाप्युक्तो देहेऽस्मिन्पुरुषः परः ॥ १३-२३ ॥
upadraṣṭānumantā ca bhartā bhoktā maheśvaraḥ | paramātmeti cāpyukto dehe'sminpuruṣaḥ paraḥ || 13-23 ||
— उपद्रष्टा (साक्षी) और अनुमन्ता ; — भर्ता, भोक्ता, महेश्वर ; — और परमात्मा भी कहा गया ; — इस देह में परम पुरुष

इस देह में परम पुरुष उपद्रष्टा (साक्षी) और अनुमन्ता (अनुमति देने वाला), भर्ता, भोक्ता और महेश्वर है, और परमात्मा भी कहा गया है।