Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 13.24 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)13.24

13.24
य एवं वेत्ति पुरुषं प्रकृतिं च गुणैः सह । सर्वथा वर्तमानोऽपि न स भूयोऽभिजायते ॥ १३-२४ ॥
ya evaṃ vetti puruṣaṃ prakṛtiṃ ca guṇaiḥ saha | sarvathā vartamāno'pi na sa bhūyo'bhijāyate || 13-24 ||
— जो इस प्रकार पुरुष को जानता है ; — और गुणों-सहित प्रकृति को ; — सब प्रकार से बरतता हुआ भी ; — वह फिर जन्म नहीं लेता

जो इस प्रकार पुरुष और गुणों-सहित प्रकृति को जानता है, वह सब प्रकार से बरतता हुआ भी फिर जन्म नहीं लेता।