सर्वतः पाणिपादं तत्सर्वतोऽक्षिशिरोमुखम् ।
सर्वतः श्रुतिमल्लोके सर्वमावृत्त्य तिष्ठति ॥
१३-१४ ॥
sarvataḥ pāṇipādaṃ tatsarvato'kṣiśiromukham |
sarvataḥ śrutimalloke sarvamāvṛttya tiṣṭhati ||
13-14 ||
उसके सब ओर हाथ-पैर हैं, सब ओर नेत्र, सिर और मुख हैं, लोक में सब ओर कान हैं; वह सब को आवृत करके स्थित है।