Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.8 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.8

11.8
नतु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा । दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे रूपमैश्वरम् ॥ ११-८ ॥
natu māṃ śakyase draṣṭumanenaiva svacakṣuṣā | divyaṃ dadāmi te cakṣuḥ paśya me rūpamaiśvaram || 11-8 ||
— किन्तु तू मुझे देखने में समर्थ नहीं ; — इस अपनी (मांस-)आँख से ; — मैं तुझे दिव्य चक्षु देता हूँ ; — मेरे ऐश्वर्ययुक्त रूप को देख

किन्तु तू मुझे इस अपनी (मांस-)आँख से देखने में समर्थ नहीं; मैं तुझे दिव्य चक्षु देता हूँ — मेरे ऐश्वर्ययुक्त रूप को देख।