Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.9
एवमुक्त्वा ततो राजन् महायोगीश्वरो हरिः ।
दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम् ॥
११-९ ॥
evamuktvā tato rājan mahāyogīśvaro hariḥ |
darśayāmāsa pārthāya paramaṃ rūpamaiśvaram ||
11-9 ||
— ऐसा कहकर, तब, हे राजन् ; — महायोगीश्वर हरि ने ; — पार्थ को दिखाया ; — परम ऐश्वर्ययुक्त रूप हे राजन्, ऐसा कहकर महायोगीश्वर हरि ने पार्थ को अपना परम ऐश्वर्ययुक्त रूप दिखाया —