Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.9 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.9

11.9
एवमुक्त्वा ततो राजन् महायोगीश्वरो हरिः । दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम् ॥ ११-९ ॥
evamuktvā tato rājan mahāyogīśvaro hariḥ | darśayāmāsa pārthāya paramaṃ rūpamaiśvaram || 11-9 ||
— ऐसा कहकर, तब, हे राजन् ; — महायोगीश्वर हरि ने ; — पार्थ को दिखाया ; — परम ऐश्वर्ययुक्त रूप

हे राजन्, ऐसा कहकर महायोगीश्वर हरि ने पार्थ को अपना परम ऐश्वर्ययुक्त रूप दिखाया —