Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.7 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.7

11.7
इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम् । मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद् द्रष्टुमिच्छसि ॥ ११-७ ॥
ihaikasthaṃ jagatkṛtsnaṃ paśyādya sacarācaram | mama dehe guḍākeśa yaccānyad draṣṭumicchasi || 11-7 ||
— यहाँ एक स्थान पर समस्त जगत् को ; — अब देख, चराचर-सहित ; — मेरे शरीर में, हे गुडाकेश ; — और जो कुछ और देखना चाहता है उसे भी

हे गुडाकेश, अब यहाँ मेरे शरीर में एक स्थान पर स्थित चराचर-सहित समस्त जगत् को देख, और जो कुछ और तू देखना चाहता है उसे भी।