Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.6 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.6

10.6
महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा । मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः ॥ १०-६ ॥
maharṣayaḥ sapta pūrve catvāro manavastathā | madbhāvā mānasā jātā yeṣāṃ loka imāḥ prajāḥ || 10-6 ||
— पूर्वकाल के सात महर्षि ; — और वैसे ही चार मनु ; — मेरे भाव वाले, मन से उत्पन्न ; — जिनकी लोक में ये प्रजाएँ

पूर्वकाल के सात महर्षि और चार मनु, जो मेरे भाव वाले हैं, मेरे मन से उत्पन्न हुए; इन्हीं से लोक में ये प्रजाएँ हैं।