Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.7 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.7

10.7
एतां विभूतिं योगं च मम यो वेत्ति तत्त्वतः । सोऽविकम्पेन योगेन युज्यते नात्र संशयः ॥ १०-७ ॥
etāṃ vibhūtiṃ yogaṃ ca mama yo vetti tattvataḥ | so'vikampena yogena yujyate nātra saṃśayaḥ || 10-7 ||
— इस विभूति और योग को ; — मेरी, जो तत्त्व से जानता है ; — वह अविचल योग से ; — युक्त होता है, इसमें संशय नहीं

जो मेरी इस विभूति और योग को तत्त्व से जानता है, वह अविचल योग से युक्त हो जाता है; इसमें कोई संशय नहीं।