Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.14 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.14

10.14
सर्वमेतदृतं मन्ये यन्मे वदसि केशव । न हि ते भगवन्व्यक्तिं विदुर्देवा महषयः ॥ १०-१४ ॥
sarvametadṛtaṃ manye yanme vadasi keśava | na hi te bhagavanvyaktiṃ vidurdevā mahaṣayaḥ || 10-14 ||
— यह सब मैं सत्य मानता हूँ ; — जो आप मुझसे कहते हैं, हे केशव ; — क्योंकि आपके व्यक्त-रूप को, हे भगवन् ; — न देवता जानते हैं न महर्षि

हे केशव, जो कुछ आप मुझसे कहते हैं, उस सबको मैं सत्य मानता हूँ; क्योंकि हे भगवन्, आपके व्यक्त-रूप को न देवता जानते हैं, न महर्षि।