Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.15 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.15

10.15
स्वयमेवात्मनात्मानं वेत्थ त्वं पुरुषोत्तम । भूतभावन भूतेश देवदेव जगत्पते ॥ १०-१५ ॥
svayamevātmanātmānaṃ vettha tvaṃ puruṣottama | bhūtabhāvana bhūteśa devadeva jagatpate || 10-15 ||
— आप स्वयं ही अपने से अपने को ; — जानते हैं, हे पुरुषोत्तम ; — हे भूतों के उत्पादक, हे भूतेश ; — हे देवदेव, हे जगत्पति

हे पुरुषोत्तम, हे भूतों के उत्पादक, हे भूतेश, हे देवदेव, हे जगत्पति, आप स्वयं ही अपने को अपने से जानते हैं।