Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.16 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.16

10.16
वक्तुमर्हस्यशेषेण विभूतीरात्मनः शुभाः । याभिर्विभूतिभिर्लोकानिमांस्त्वं व्याप्य तिष्ठसि ॥ १०-१६ ॥
vaktumarhasyaśeṣeṇa vibhūtīrātmanaḥ śubhāḥ | yābhirvibhūtibhirlokānimāṃstvaṃ vyāpya tiṣṭhasi || 10-16 ||
— आप पूर्णतः कहने में समर्थ हैं ; — अपनी शुभ विभूतियों को ; — जिन विभूतियों से लोकों को ; — इन को आप व्याप्त करके स्थित हैं

आप अपनी उन शुभ विभूतियों को पूर्णतः कहने में समर्थ हैं, जिन विभूतियों से आप इन लोकों को व्याप्त करके स्थित हैं।