पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः ।
दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसङ्करकारकैः ॥
१-४३ ॥
patanti pitaro hyeṣāṃ luptapiṇḍodakakriyāḥ |
doṣairetaiḥ kulaghnānāṃ varṇasaṅkarakārakaiḥ ||
1-43 ||
क्योंकि इन वर्णसंकर उत्पन्न करने वाले कुलघातियों के दोषों से, पिण्ड और जल की क्रियाओं से वञ्चित होकर इनके पितर पतित हो जाते हैं।