Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 1.11 / 47

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)1.11

1.11
अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः । भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ॥ १-११ ॥
ayaneṣu ca sarveṣu yathābhāgamavasthitāḥ | bhīṣmamevābhirakṣantu bhavantaḥ sarva eva hi || 1-11 ||
— और सब मोर्चों पर ; — अपने-अपने स्थान के अनुसार ; — स्थित रहकर ; — केवल भीष्म की ; — रक्षा करें ; — आप सब निश्चय ही

और सब मोर्चों पर अपने-अपने स्थान पर स्थित रहकर आप सब लोग सब ओर से केवल भीष्म की ही रक्षा कीजिए।