The Great Liberation Tantra· 3.127 / 153

The Great Liberation Tantra3.127

3.127
विधयः किङ्करा यत्र निषेधाः प्रभवोऽपि न । स्वेच्छाचारेणेष्टसिद्धिस्तद्विना कोऽन्यमाश्रयेत् ॥१२७॥
vidhayaḥ kiṅkarā yatra niṣedhāḥ prabhavo'pi na | svecchācāreṇeṣṭasiddhistadvinā ko'nyamāśrayet ||127||
— विधियाँ ; — किंकर, सेवक ; — जहाँ ; — निषेध ; — प्रभावी ; — भी ; — नहीं ; — स्वेच्छाचार से ; — अभीष्ट की सिद्धि ; — उसके बिना ; — कौन ; — अन्य का ; — आश्रय ले

जहाँ विधियाँ (उसके) किंकर हैं, और निषेध भी प्रभावी नहीं — वहाँ स्वेच्छाचार से ही अभीष्ट की सिद्धि होती है। उसके बिना और किसका आश्रय लिया जाए?