The Great Liberation Tantra· 3.126 / 153

The Great Liberation Tantra3.126

3.126
प्रातःकृत्यं प्रातरेव सन्ध्यां कुर्यात् त्रिकालतः । मध्याह्ने पूजनं कुर्यात् सर्वतन्त्रेष्वयं विधिः । परब्रह्मोपासने तु साधकेच्छाविधिः शिवे ॥१२६॥
prātaḥkṛtyaṃ prātareva sandhyāṃ kuryāt trikālataḥ | madhyāhne pūjanaṃ kuryāt sarvatantreṣvayaṃ vidhiḥ | parabrahmopāsane tu sādhakecchāvidhiḥ śive ||126||
— प्रातः-कृत्य ; — प्रातःकाल में ही ; — सन्ध्या को ; — करे ; — तीनों कालों में ; — मध्याह्न में ; — पूजन ; — करे ; — समस्त तन्त्रों में यह ; — विधि ; — परम ब्रह्म की उपासना में ; — परन्तु ; — साधक की इच्छा ही विधि ; — हे शिवे

प्रातः-कृत्य प्रातःकाल में ही, सन्ध्या तीनों कालों में, पूजन मध्याह्न में करे — समस्त तन्त्रों में यह विधि है; पर हे शिवे, परम ब्रह्म की उपासना में साधक की इच्छा ही विधि है।