न दिक्कालविचारोऽस्ति न मुद्रान्याससंहतिः ।
यत्साधने कुलेशानि तं विना कोऽन्यमाश्रयेत् ॥५४॥
na dikkālavicāro'sti na mudrānyāsasaṃhatiḥ |
yatsādhane kuleśāni taṃ vinā ko'nyamāśrayet ||54||
— नहीं; — दिशा-काल का विचार; — है; — नहीं; — मुद्रा और न्यास की समष्टि; — जिसके साधन में; — हे कुलेशानि; — उसे; — बिना, छोड़कर; — कौन; — अन्य का; — आश्रय ले
न दिशा-काल का विचार है, न मुद्रा और न्यास की समष्टि। हे कुलेशानि, जिसके साधन में (यह सब अनावश्यक है), उसे छोड़कर और किसका आश्रय लिया जाए?