The Great Liberation Tantra· 2.54 / 54

The Great Liberation Tantra2.54

2.54
न दिक्कालविचारोऽस्ति न मुद्रान्याससंहतिः । यत्साधने कुलेशानि तं विना कोऽन्यमाश्रयेत् ॥५४॥
na dikkālavicāro'sti na mudrānyāsasaṃhatiḥ | yatsādhane kuleśāni taṃ vinā ko'nyamāśrayet ||54||
— नहीं ; — दिशा-काल का विचार ; — है ; — नहीं ; — मुद्रा और न्यास की समष्टि ; — जिसके साधन में ; — हे कुलेशानि ; — उसे ; — बिना, छोड़कर ; — कौन ; — अन्य का ; — आश्रय ले

न दिशा-काल का विचार है, न मुद्रा और न्यास की समष्टि। हे कुलेशानि, जिसके साधन में (यह सब अनावश्यक है), उसे छोड़कर और किसका आश्रय लिया जाए?