विष्णुः पालयिता देवि संहर्ताऽहं तदिच्छया ।
इन्द्रादयो लोकपालाः सर्वे तद्वशवर्तिनः ॥४१॥
viṣṇuḥ pālayitā devi saṃhartā'haṃ tadicchayā |
indrādayo lokapālāḥ sarve tadvaśavartinaḥ ||41||
हे देवि, पालक रूप में वही विष्णु है; उसकी इच्छा से संहारक रूप में मैं (वही) हूँ। इन्द्र आदि समस्त लोकपाल उसी के वश में रहते हैं।