The Great Liberation Tantra· 2.41 / 54

The Great Liberation Tantra2.41

2.41
विष्णुः पालयिता देवि संहर्ताऽहं तदिच्छया । इन्द्रादयो लोकपालाः सर्वे तद्वशवर्तिनः ॥४१॥
viṣṇuḥ pālayitā devi saṃhartā'haṃ tadicchayā | indrādayo lokapālāḥ sarve tadvaśavartinaḥ ||41||
— विष्णु (रूप में) ; — पालक ; — हे देवि ; — संहारक ; — मैं ; — उसकी इच्छा से ; — इन्द्र आदि ; — लोकपाल ; — सब ; — उसके वश में रहने वाले

हे देवि, पालक रूप में वही विष्णु है; उसकी इच्छा से संहारक रूप में मैं (वही) हूँ। इन्द्र आदि समस्त लोकपाल उसी के वश में रहते हैं।