The Great Liberation Tantra· 2.27 / 54

The Great Liberation Tantra2.27

2.27
सर्वलोकोपकाराय सर्वप्राणिहिताय च । युगधर्मानुसारेण याथातथ्येन पार्वति ॥२७॥
sarvalokopakārāya sarvaprāṇihitāya ca | yugadharmānusāreṇa yāthātathyena pārvati ||27||
— समस्त लोकों के उपकार के लिए ; — सब प्राणियों के हित के लिए ; — और ; — युग-धर्म के अनुसार ; — यथार्थ रूप से ; — हे पार्वति

हे पार्वति, समस्त लोकों के उपकार के लिए, सब प्राणियों के हित के लिए, युग-धर्म के अनुसार और यथार्थ रूप से (कहे)।