The Great Liberation Tantra· 2.28 / 54

The Great Liberation Tantra2.28

2.28
त्वया यादृक्कृताः प्रश्ना न केनापि पुरा कृताः । तव स्नेहेन वक्ष्यामि सारात्सारं परात्परं ॥२८॥
tvayā yādṛkkṛtāḥ praśnā na kenāpi purā kṛtāḥ | tava snehena vakṣyāmi sārātsāraṃ parātparaṃ ||28||
— तुम्हारे द्वारा ; — जैसे किए गए ; — प्रश्न ; — नहीं ; — किसी के द्वारा भी ; — पूर्व में ; — किए गए ; — तुम्हारे ; — स्नेह से ; — कहूँगा ; — सार का भी सार ; — परात्पर को

जैसे प्रश्न तुमने किए, वैसे पहले किसी ने नहीं किए; तुम्हारे स्नेह से मैं सार का भी सार, परात्पर (तत्त्व) कहूँगा।