The Great Liberation Tantra· 1.57 / 72

The Great Liberation Tantra1.57

1.57
वीरसाधनकर्माणि पञ्चतत्त्वोदितानि च । मद्यं मांसं तथा मत्स्यमुद्रामैथुनमेव च । एतानि पञ्चतत्त्वानि त्वया प्रोक्तानि शङ्कर ॥५७॥
vīrasādhanakarmāṇi pañcatattvoditāni ca | madyaṃ māṃsaṃ tathā matsyamudrāmaithunameva ca | etāni pañcatattvāni tvayā proktāni śaṅkara ||57||
— वीर-साधन के कर्म ; — पंचतत्त्व सहित कहे गए ; — और ; — मद्य ; — मांस ; — इसी प्रकार ; — मत्स्य ; — मुद्रा और मैथुन ; — निश्चय ही ; — और ; — ये ; — पाँच तत्त्व ; — तुम्हारे द्वारा ; — कहे गए ; — हे शंकर

वीर-साधन के कर्म पंचतत्त्व सहित कहे गए — मद्य, मांस, मत्स्य, मुद्रा और मैथुन: हे शंकर, ये पाँच तत्त्व आपने ही कहे।