The Great Liberation Tantra· 1.58 / 72

The Great Liberation Tantra1.58

1.58
कलिजा मानवा लुब्धाः शिश्नोदरपरायणाः । लोभात्तत्र पतिष्यन्ति न करिष्यन्ति साधनम् ॥५८॥
kalijā mānavā lubdhāḥ śiśnodaraparāyaṇāḥ | lobhāttatra patiṣyanti na kariṣyanti sādhanam ||58||
— कलियुग में उत्पन्न ; — मनुष्य ; — लोभी ; — शिश्न और उदर में तत्पर ; — लोभ से ; — उसमें ; — गिरेंगे ; — नहीं ; — करेंगे ; — (यथार्थ) साधन

कलियुग में उत्पन्न मनुष्य लोभी, शिश्न और उदर में तत्पर होंगे; लोभ के कारण वे उसमें (पंचतत्त्व में) पतित होंगे, और (यथार्थ) साधन नहीं करेंगे।