The Great Liberation Tantra· 1.59 / 72

The Great Liberation Tantra1.59

1.59
इन्द्रियाणां सुखार्थाय पीत्वा च बहुलं मधु । भविष्यन्ति मदोन्मत्ता हिताहितविवर्जिताः ॥५९॥
indriyāṇāṃ sukhārthāya pītvā ca bahulaṃ madhu | bhaviṣyanti madonmattā hitāhitavivarjitāḥ ||59||
— इन्द्रियों के ; — सुख के लिए ; — पीकर ; — और ; — प्रचुर रूप से ; — मद्य, मधु ; — होंगे ; — मद से उन्मत्त ; — हित-अहित से रहित

इन्द्रियों के सुख के लिए वे प्रचुर मद्य पीकर मद से उन्मत्त हो जाएँगे और हित-अहित के विवेक से रहित हो जाएँगे।