आधारेष्वथवाशक्त्या ज्ञानाद्वा देशकल्पनात् ।
उज्जाते शक्तिसंशोभे शान्ते पश्चात्तदा भवेत् ॥१४७॥
ādhāreṣv athavāśaktyā jñānād vā deśakalpanāt |
ujjāte śaktisaṃśobhe śānte paścāt tadā bhavet
anuṣṭubh
[पुनरुक्ति — श्लोक ९५] आधारों पर, या अशक्ति से, या ज्ञान से, या देश-कल्पना से जब शक्ति-संशोभ उत्पन्न हो, उसके शान्त होने पर तब (परम अवस्था) हो जाती है।