The Essence of the Tantra· 9.29 / 53

The Essence of the Tantra9.29

9.29

अधुना समस्तं पृथिवीतत्त्वं प्रमातृप्रमेयरूपम् उद्दिश्य निरूप्यते यो धरातत्त्वाभेदेन प्रकाशः स शिवः

Transliteration (IAST)

adhunā samastaṃ pṛthivītattvaṃ pramātṛprameyarūpam uddiśya nirūpyate yo dharātattvābhedena prakāśaḥ sa śivaḥ

— अब ; — समस्त पृथिवी-तत्त्व ; — प्रमातृ-प्रमेय रूप को उद्दिष्ट कर ; — निरूपित किया जाता है ; — जो धरा-तत्त्व से अभेद रूप प्रकाश ; — वह शिव

अब समस्त पृथिवी-तत्त्व को प्रमातृ-प्रमेय रूप से उद्दिष्ट कर निरूपित किया जाता है: जो धरा-तत्त्व से अभेद रूप प्रकाश है, वह शिव है।