The Essence of the Tantra· 7.27 / 28

The Essence of the Tantra7.27

7.27

तेष्व् आयतनेषु ये म्रियन्ते तेषां तत्र तत्र गतिं ते वितरन्ति

Transliteration (IAST)

teṣv āyataneṣu ye mriyante teṣāṃ tatra tatra gatiṃ te vitaranti

— आयतनों में (पवित्र स्थानों में) ; — मरते हैं ; — उस-उस (भुवन को) ; — गति — (मरणोत्तर) गन्तव्य ; — प्रदान करते हैं

उन आयतनों (पवित्र स्थानों) में जो मरते हैं, उन्हें वे उस-उस (भुवन की) गति प्रदान करते हैं।