The Essence of the Tantra· 7.28 / 28

The Essence of the Tantra7.28

7.28

क्रमाच् च ऊर्ध्वोर्ध्वं प्रेरयन्ति दीक्षाक्रमेण

Transliteration (IAST)

kramāc ca ūrdhvordhvaṃ prerayanti dīkṣākrameṇa

— क्रमशः, क्रम से ; — ऊर्ध्व-ऊर्ध्व (उच्चतर-उच्चतर) ; — प्रेरित करते हैं, आगे बढ़ाते हैं ; — दीक्षा-क्रम से

और दीक्षा-क्रम से क्रमशः ऊर्ध्व-ऊर्ध्व (उच्चतर-उच्चतर) प्रेरित करते हैं।