The Essence of the Tantra· 6.53 / 82

The Essence of the Tantra6.53

6.53

अस्मात् सामनस्यात् अकल्यात् कालात् निमेषोन्मेषमात्रतया प्रोक्ताशेषकालप्रसरप्रविलयचक्रभ्रमोदयः

Transliteration (IAST)

asmāt sāmanasyāt akalyāt kālāt nimeṣonmeṣamātratayā proktāśeṣakālaprasarapravilayacakrabhramodayaḥ

— इस सामनस्य से ; — अकल्य (अमेय) काल से ; — निमेष-उन्मेष-मात्र (पलक झपकने) से ; — उक्त समस्त काल-प्रसर एवं प्रविलय के चक्र-भ्रम का उदय

इस सामनस्य रूप अकल्य (अमेय) काल से, निमेष-उन्मेष-मात्र (पलक झपकने) से, उक्त समस्त काल-प्रसर एवं प्रविलय के चक्र-भ्रम का उदय होता है।