The Essence of the Tantra· 6.52 / 82

The Essence of the Tantra6.52

6.52

अनाश्रितः सामनसे पदे यत् तत् सामनस्यं साम्यं तत् ब्रह्म

Transliteration (IAST)

anāśritaḥ sāmanase pade yat tat sāmanasyaṃ sāmyaṃ tat brahma

— अनाश्रित (आश्रय-रहित) ; — सामनस पद में ; — सामनस्य — सामनस की दशा ; — साम्य — समता, सन्तुलन ; — ब्रह्म

अनाश्रित सामनस पद में (लीन होता है); वह सामनस्य साम्य है, और वही ब्रह्म है।