The Essence of the Tantra· 4.36 / 46

The Essence of the Tantra4.36

4.36

ता एताः चतस्रः शक्तयः स्वातन्त्र्यात् प्रत्येकं त्रिधैव वर्तन्ते

Transliteration (IAST)

tā etāḥ catasraḥ śaktayaḥ svātantryāt pratyekaṃ tridhaiva vartante

— ये चार शक्तियाँ ; — स्वातन्त्र्य से ; — प्रत्येक तीन-तीन प्रकार से ही ; — वर्तमान रहती हैं, क्रियाशील होती हैं

वही ये चार शक्तियाँ स्वातन्त्र्य से प्रत्येक तीन-तीन प्रकार से ही वर्तमान रहती हैं —