The Essence of the Tantra· 3.25 / 34

The Essence of the Tantra3.25

3.25

स च एष विसर्गस् त्रिधा आणवः चित्तविश्रान्तिरूपः शाक्तः चित्तसम्बोधलक्षणः शाम्भवः चित्तप्रलयरूपः इति

Transliteration (IAST)

sa ca eṣa visargas tridhā āṇavaḥ cittaviśrāntirūpaḥ śāktaḥ cittasambodhalakṣaṇaḥ śāmbhavaḥ cittapralayarūpaḥ iti

— विसर्ग ; — तीन प्रकार का ; — आणव — आणव (व्यक्ति-स्तरीय) विसर्ग ; — चित्त-विश्रान्ति-रूप ; — शाक्त विसर्ग ; — चित्त-सम्बोध-लक्षण — चित्त के जागरण से युक्त ; — शाम्भव विसर्ग ; — चित्त-प्रलय-रूप — चित्त के विलय रूप

और यह विसर्ग तीन प्रकार का है — आणव, जो चित्त-विश्रान्ति-रूप है; शाक्त, जो चित्त-सम्बोध-लक्षण है; और शाम्भव, जो चित्त-प्रलय-रूप है।