The Essence of the Tantra· 3.24 / 34

The Essence of the Tantra3.24

3.24

तस्य च एकैव कौलिकी विसर्गशक्तिः यया आनन्दरूपात् प्रभृति इयता बहिःसृष्टिपर्यन्तेन प्रस्पन्दतः वर्गादिपरामर्शा एव बहिस् तत्त्वरूपतां प्राप्ताः

Transliteration (IAST)

tasya ca ekaiva kaulikī visargaśaktiḥ yayā ānandarūpāt prabhṛti iyatā bahiḥsṛṣṭiparyantena praspandataḥ vargādiparāmarśā eva bahis tattvarūpatāṃ prāptāḥ

— एक ही कौलिकी विसर्ग-शक्ति ; — आनन्द-रूप से लेकर ; — इतने (विस्तार) में ; — बाह्य सृष्टि-पर्यन्त ; — प्रस्पन्दित होती हुई (शक्ति) का ; — वर्ग आदि के परामर्श ; — बाहर तत्त्व-रूपता को प्राप्त होते हैं

और उसकी एक ही कौलिकी विसर्ग-शक्ति है, जिसके द्वारा आनन्द-रूप से लेकर बाह्य सृष्टि-पर्यन्त इतने (विस्तार) में प्रस्पन्दित होते हुए वर्ग आदि के परामर्श ही बाहर तत्त्व-रूपता को प्राप्त होते हैं।