The Essence of the Tantra· 3.23 / 34

The Essence of the Tantra3.23

3.23

इत्य् एव एष भगवान् अनुत्तर एव कुलेश्वररूपः

Transliteration (IAST)

ity eva eṣa bhagavān anuttara eva kuleśvararūpaḥ

— यह भगवान् ; — अनुत्तर ही ; — कुलेश्वर-रूप — कुल (समष्टि) के स्वामी का रूप

इस प्रकार यह भगवान् अनुत्तर ही कुलेश्वर-रूप है।