एवम् एतेभ्यो यागेभ्यो ऽन्यतमं कृत्वा यदि तथाविधनिर्विचिकित्सतापचित्रितहृदयः शिष्यो भवति तदा तस्मै तद्यागदर्शनपूर्वकं तिलाज्याहुतिपूर्वकनिरपेक्षम् एव पूर्वोक्तव्याप्त्या अनुसन्धानक्रमेण अवलोकनया दीक्षां कुर्यात् परोक्षदीक्षादिके नैमित्तिकान्ते तु पूर्व एव विधिः
Transliteration (IAST)
evam etebhyo yāgebhyo 'nyatamaṃ kṛtvā yadi tathāvidhanirvicikitsatāpacitritahṛdayaḥ śiṣyo bhavati tadā tasmai tadyāgadarśanapūrvakaṃ tilājyāhutipūrvakanirapekṣam eva pūrvoktavyāptyā anusandhānakrameṇa avalokanayā dīkṣāṃ kuryāt parokṣadīkṣādike naimittikānte tu pūrva eva vidhiḥ
इस प्रकार इन यागों में से किसी एक को करके, यदि शिष्य वैसी निर्विचिकित्सता (निःसंशयता) से अलंकृत हृदय वाला हो जाता है, तब उसके लिए उस याग के दर्शन-पूर्वक, तिल एवं आज्य (घृत) की आहुति की अपेक्षा के बिना ही, पूर्वोक्त व्याप्ति से अनुसन्धान-क्रम द्वारा, अवलोकन (दृष्टि-मात्र) से दीक्षा करे। किन्तु परोक्ष-दीक्षा आदि से लेकर नैमित्तिक-पर्यन्त (कर्मों में) तो पूर्व ही विधि (लागू होती है)।