The Essence of the Tantra· 20.5 / 65

The Essence of the Tantra20.5

20.5

नैमित्तिकं तु तच्छासनस्थानाम् अपि अनियतम् तद्यथा गुरुतद्वर्गागमनं तत्पर्वदिनं ज्ञानलाभदिनम् इत्यादिकम् इति केचित्

Transliteration (IAST)

naimittikaṃ tu tacchāsanasthānām api aniyatam tadyathā gurutadvargāgamanaṃ tatparvadinaṃ jñānalābhadinam ityādikam iti kecit

— किन्तु नैमित्तिक कर्म ; — उस शासन में स्थितों के लिए भी ; — अनियत (नियत-समय-रहित) ; — गुरु अथवा उसके वर्ग का आगमन ; — उसका पर्व-दिन ; — ज्ञान-लाभ-दिन ; — ऐसा कुछ (कहते हैं)

किन्तु नैमित्तिक उस शासन में स्थितों के लिए भी अनियत (नियत-समय-रहित) है — जैसे गुरु अथवा उसके वर्ग का आगमन, उसका पर्व-दिन, ज्ञान-लाभ-दिन इत्यादि — ऐसा कुछ (कहते हैं)।