The Essence of the Tantra· 20.6 / 65

The Essence of the Tantra20.6

20.6

तत्र नियतपूजा सन्ध्योपासा गुरुपूजा पर्वपूजा पवित्रकम् इति अवश्यम्भावि

Transliteration (IAST)

tatra niyatapūjā sandhyopāsā gurupūjā parvapūjā pavitrakam iti avaśyambhāvi

— नियत-पूजा ; — सन्ध्या-उपासा (दिन की सन्धियों पर उपासना) ; — गुरु-पूजा ; — पर्व-पूजा ; — पवित्रक (पवित्र-सूत्र अनुष्ठान) ; — अवश्यम्भावी — अवश्य करणीय

वहाँ नियत-पूजा — सन्ध्या-उपासा, गुरु-पूजा, पर्व-पूजा, पवित्रक — अवश्यम्भावी (अवश्य करणीय) है।