The Essence of the Tantra· 14.12 / 29

The Essence of the Tantra14.12

14.12

ते ऽपि हि एवम् अनुगृहीता भवन्ति इति कारुणिकतया पशुविधौ न विचिकित्सेत्

Transliteration (IAST)

te 'pi hi evam anugṛhītā bhavanti iti kāruṇikatayā paśuvidhau na vicikitset

— वे भी ; — इस प्रकार ; — अनुगृहीत — अनुग्रह-प्राप्त ; — हो जाते हैं ; — इति (तर्क-सूचक) ; — कारुणिकता (करुणा) से ; — पशु-विधि में (पशु-अर्पण की विधि में) ; — विचिकित्सा (संशय/संकोच) न करे

क्योंकि वे भी इस प्रकार अनुगृहीत हो जाते हैं — अतः कारुणिकता (करुणा) से पशु-विधि में विचिकित्सा (संशय) न करे।