The Essence of the Tantra· 14.11 / 29

The Essence of the Tantra14.11

14.11

पशूंश् च जीवतो निवेदयेत्

Transliteration (IAST)

paśūṃś ca jīvato nivedayet

— पशुओं को (बद्ध प्राणियों को) ; — और ; — जीवित रहते हुए ; — निवेदित करे (अर्पित करे)

और पशुओं को जीवित रहते हुए निवेदित करे।