The Essence of the Tantra· 13.11 / 101

The Essence of the Tantra13.11

13.11

एवं क्रियाक्रमेणापि परमेश्वरीकृतसमस्तकारकः तयैव दृशा सर्वक्रियाः पश्यन् विनापि प्रमुखज्ञानयोगाभ्यां परमेश्वर एव भवति

Transliteration (IAST)

evaṃ kriyākrameṇāpi parameśvarīkṛtasamastakārakaḥ tayaiva dṛśā sarvakriyāḥ paśyan vināpi pramukhajñānayogābhyāṃ parameśvara eva bhavati

— क्रिया-क्रम से (अनुष्ठान-क्रम से) ; — समस्त कारकों को परमेश्वरी-कृत कर के ; — उसी दृष्टि से ; — समस्त क्रियाओं को देखता हुआ ; — प्रमुख ज्ञान एवं योग (के बिना भी) ; — परमेश्वर ही हो जाता है

इस प्रकार क्रिया-क्रम से भी समस्त कारकों को परमेश्वरी-कृत कर के, उसी दृष्टि से समस्त क्रियाओं को देखता हुआ (साधक) प्रमुख ज्ञान एवं योग के बिना भी परमेश्वर ही हो जाता है।