The Essence of the Tantra· 11.8 / 25

The Essence of the Tantra11.8

11.8

भेददर्शन इव अनादिशिवसन्निधौ मुक्तशिवानां सृष्टिलयादिकृत्येषु मन्दतीव्रात् शक्तिपातात् सद्गुरुविषया यियासा भवति असद्गुरुविषयायां तु तिरोभाव एव असद्गुरुतस् तु सद्गुरुगमनं शक्तिपाताद् एव

Transliteration (IAST)

bhedadarśana iva anādiśivasannidhau muktaśivānāṃ sṛṣṭilayādikṛtyeṣu mandatīvrāt śaktipātāt sadguruviṣayā yiyāsā bhavati asadguruviṣayāyāṃ tu tirobhāva eva asadgurutas tu sadgurugamanaṃ śaktipātād eva

— भेद-दर्शन में (द्वैत मत में) ; — अनादि शिव की सन्निधि में ; — मुक्त शिवों की ; — सृष्टि-लय आदि कृत्यों में ; — मन्द-तीव्र (शक्तिपात) से ; — सद्गुरु-विषयक यियासा (जाने की इच्छा) ; — असद्गुरु-विषयक (इच्छा) में ; — तिरोभाव — आच्छादक शक्ति ; — सद्गुरु की ओर गमन

जैसे भेद-दर्शन में अनादि शिव की सन्निधि में मुक्त शिवों की सृष्टि-लय आदि कृत्यों में (प्रवृत्ति होती है) — (वैसे ही यहाँ): मन्द-तीव्र शक्तिपात से सद्गुरु-विषयक यियासा (जाने की इच्छा) होती है। किन्तु असद्गुरु-विषयक (इच्छा) में तो तिरोभाव ही है; और असद्गुरु से सद्गुरु की ओर गमन शक्तिपात से ही (होता है)।