व्याप्यः स देश एकेन व्याप्यतेऽप्यपरैः कथम् ।
परस्परेण व्याप्यत्वाद्व्याप्यव्यापकता भवेत् ॥९९॥
vyāpyaḥ sa deśa ekena vyāpyate'pyaparaiḥ katham |
paraspareṇa vyāpyatvādvyāpyavyāpakatā bhavet
वह देश (स्थान), व्याप्य होने के कारण, एक के द्वारा व्याप्त किया जाता है — तब वह अन्यों के द्वारा भी कैसे (व्याप्त हो)? (क्योंकि यदि ऐसा हो,) तो परस्पर व्याप्यता के कारण (अणुओं में ही) व्याप्य-व्यापकता का (सम्बन्ध) उत्पन्न हो जाएगा (— जो वस्तुवादी के लिए असंगत है)।