The Vision of Śiva· 6.99 / 126

The Vision of Śiva6.99

6.99
व्याप्यः स देश एकेन व्याप्यतेऽप्यपरैः कथम् । परस्परेण व्याप्यत्वाद्व्याप्यव्यापकता भवेत् ॥९९॥
vyāpyaḥ sa deśa ekena vyāpyate'pyaparaiḥ katham | paraspareṇa vyāpyatvādvyāpyavyāpakatā bhavet
— व्याप्य ; — वह देश ; — एक के द्वारा ; — व्याप्त किया जाता है ; — भी ; — अन्यों के द्वारा ; — कैसे? ; — परस्पर ; — व्याप्यता के कारण ; — व्याप्य-व्यापकता ; — उत्पन्न हो जाएगी

वह देश (स्थान), व्याप्य होने के कारण, एक के द्वारा व्याप्त किया जाता है — तब वह अन्यों के द्वारा भी कैसे (व्याप्त हो)? (क्योंकि यदि ऐसा हो,) तो परस्पर व्याप्यता के कारण (अणुओं में ही) व्याप्य-व्यापकता का (सम्बन्ध) उत्पन्न हो जाएगा (— जो वस्तुवादी के लिए असंगत है)।