The Vision of Śiva· 6.16 / 126

The Vision of Śiva6.16

6.16
पाञ्चरात्रविदश्चान्ये वदन्ति परिनिष्ठितम् । ब्रह्मास्ति वासुदेवाख्यं स एव जगदीश्वरः ॥१६॥
pāñcarātravidaścānye vadanti pariniṣṭhitam | brahmāsti vāsudevākhyaṃ sa eva jagadīśvaraḥ
— पांचरात्र के ज्ञाता ; — और अन्य ; — कहते हैं ; — परिनिष्ठित (पूर्ण) ; — ब्रह्म ; — है ; — वासुदेव नामक ; — वही ; — जगत् का ईश्वर

और अन्य, पांचरात्र के ज्ञाता, कहते हैं कि वासुदेव नामक एक परिनिष्ठित (पूर्ण) ब्रह्म है; वही जगत् का ईश्वर है।