The Vision of Śiva4.6
तथा यत्र सदित्येवं प्रतीतिस्तदसत्कथम् ।
यत्सत्तत्परमार्थो हि परमार्थस्ततः शिवः ॥६॥
tathā yatra sadityevaṃ pratītistadasatkatham |
yatsattatparamārtho hi paramārthastataḥ śivaḥ
— इसी प्रकार ; — जहाँ ; — 'है' (सत्) ; — ऐसी ; — प्रतीति ; — वह ; — असत् ; — कैसे ; — जो ; — सत् ; — वह ; — परमार्थ ; — निश्चय ही ; — परमार्थ ; — इसलिए ; — शिव इसी प्रकार, जहाँ 'है' — ऐसी प्रतीति होती है, वह असत् कैसे हो? जो सत् है, वही परमार्थ है; और परमार्थ शिव है।