The Vision of Śiva· 4.51 / 124

The Vision of Śiva4.51

4.51
इतोऽपि विद्धि सत्कार्यं मृत्पिण्डात्किं घटः पृथक् ॥५१॥
ito'pi viddhi satkāryaṃ mṛtpiṇḍātkiṃ ghaṭaḥ pṛthak
— इस (विचार) से भी ; — जान लो ; — सत्कार्य ; — मृत्पिण्ड (मिट्टी के लोंदे) से ; — क्या ; — घट ; — पृथक्

इस (विचार) से भी सत्कार्य जान लो: क्या घट मृत्पिण्ड (मिट्टी के लोंदे) से पृथक् है?