पातञ्जलादीश्वरेण न साम्यमविभेदतः ।
इह तद्वन्न विज्ञेयं तस्मात्सर्वं स्थितः शिवः ॥९९॥
pātañjalādīśvareṇa na sāmyamavibhedataḥ |
iha tadvanna vijñeyaṃ tasmātsarvaṃ sthitaḥ śivaḥ
पातंजल (योग) आदि के ईश्वर के साथ (हमारी) समानता नहीं, क्योंकि (हमारा) अविभेद (अद्वैत मत है); यहाँ (शिव को) उस (पृथक् ईश्वर) के समान नहीं समझना चाहिए। इसलिए शिव सब कुछ रूप में स्थित है।