The Vision of Śiva· 3.99 / 99

The Vision of Śiva3.99

3.99
पातञ्जलादीश्वरेण न साम्यमविभेदतः । इह तद्वन्न विज्ञेयं तस्मात्सर्वं स्थितः शिवः ॥९९॥
pātañjalādīśvareṇa na sāmyamavibhedataḥ | iha tadvanna vijñeyaṃ tasmātsarvaṃ sthitaḥ śivaḥ
— पातंजल (योग) आदि के ईश्वर के साथ ; — नहीं ; — समानता ; — अविभेद (अद्वैत) के कारण ; — यहाँ ; — उस (पृथक् ईश्वर) के समान ; — नहीं ; — समझना चाहिए ; — इसलिए ; — सब कुछ ; — स्थित ; — शिव

पातंजल (योग) आदि के ईश्वर के साथ (हमारी) समानता नहीं, क्योंकि (हमारा) अविभेद (अद्वैत मत है); यहाँ (शिव को) उस (पृथक् ईश्वर) के समान नहीं समझना चाहिए। इसलिए शिव सब कुछ रूप में स्थित है।