The Vision of Śiva· 3.93 / 99

The Vision of Śiva3.93

3.93
क्रियान्तरेच्छासंभूतौ तन्निमित्तमनन्तता । यतोऽस्ति शिवशक्तीनां ताश्च नित्यमवस्थिताः ॥९३॥
kriyāntarecchāsaṃbhūtau tannimittamanantatā | yato'sti śivaśaktīnāṃ tāśca nityamavasthitāḥ
— दूसरी क्रिया की इच्छा के उद्भव में ; — जिसका निमित्त वह है ; — अनन्तता (निरन्तरता) ; — क्योंकि ; — है ; — शिव की शक्तियों की ; — और वे ; — नित्य ; — अवस्थित

— दूसरी क्रिया की इच्छा के उद्भव में, उससे उत्पन्न अनन्तता (निरन्तरता) होती है; क्योंकि शिव की शक्तियाँ (सदा) विद्यमान हैं, और वे नित्य अवस्थित हैं।