The Vision of Śiva· 3.53 / 99

The Vision of Śiva3.53

3.53
शक्तित्रयस्वरूपत्वं सर्वं यत्रास्त्यवस्थितम् ॥५३॥
śaktitrayasvarūpatvaṃ sarvaṃ yatrāstyavasthitam
— शक्ति-त्रय-स्वरूपत्व ; — सब ; — जहाँ ; — है ; — अवस्थित

(किन्तु हमारे मत में) जहाँ सब कुछ शक्ति-त्रय-स्वरूप रूप में अवस्थित है (वहाँ ऐसा कोई पतन नहीं होता)।