The Vision of Śiva· 3.4 / 99

The Vision of Śiva3.4

3.4
सामर्थ्यं यदि कल्प्येत तन्नामानन्त्यमेव वा ॥४॥
sāmarthyaṃ yadi kalpyeta tannāmānantyameva vā
— सामर्थ्य ; — यदि ; — कल्पित किया जाए ; — तो निश्चय ही ; — (अनन्त) अनवस्था ही ; — अथवा

यदि (शिव का) सामर्थ्य (उससे भिन्न) कल्पित किया जाए, तो निश्चय ही (आगे-आगे सामर्थ्यों का) अनन्त्य (अनवस्था) ही (आ पड़ेगा)।