The Vision of Śiva· 3.18 / 99

The Vision of Śiva3.18

3.18
पिण्डे वा कटिकायां वा किं सुवर्णत्वमिष्यते ॥१८॥
piṇḍe vā kaṭikāyāṃ vā kiṃ suvarṇatvamiṣyate
— पिण्ड में ; — या ; — कटिका (छड़) में ; — या ; — क्या नहीं ; — सुवर्णत्व ; — इष्ट (मान्य)

पिण्ड में या कटिका (छड़) में — क्या सुवर्णत्व इष्ट नहीं (मान्य नहीं)?