3.18 पिण्डे वा कटिकायां वा किं सुवर्णत्वमिष्यते ॥१८॥ piṇḍe vā kaṭikāyāṃ vā kiṃ suvarṇatvamiṣyate piṇḍe — पिण्ड में ; vā — या ; kaṭikāyām — कटिका (छड़) में ; vā — या ; kim — क्या नहीं ; suvarṇatvam — सुवर्णत्व ; iṣyate — इष्ट (मान्य) पिण्ड में या कटिका (छड़) में — क्या सुवर्णत्व इष्ट नहीं (मान्य नहीं)?