The Vision of Śiva· 3.17 / 99

The Vision of Śiva3.17

3.17
तस्मात्समग्राकारेषु सर्वासु प्रतिपत्तिषु । विज्ञेयं शिवरूपत्वं स्वशक्त्यावेशनात्मकम् ॥१७॥
tasmātsamagrākāreṣu sarvāsu pratipattiṣu | vijñeyaṃ śivarūpatvaṃ svaśaktyāveśanātmakam
— इसलिए ; — समग्र आकारों में ; — समस्त ; — प्रतिपत्तियों (ज्ञानों) में ; — ज्ञातव्य ; — शिव-रूपता ; — अपनी शक्ति के आवेशन (अन्तर्निवास) से युक्त

इसलिए, सभी समग्र आकारों में, समस्त प्रतिपत्तियों (ज्ञानों) में, शिव-रूपता ज्ञातव्य है — जो अपनी शक्ति के आवेशन (अन्तर्निवास) से युक्त है।