The Vision of Śiva· 2.55 / 90

The Vision of Śiva2.55

2.55
पश्यन्त्या दर्शनं दृष्टे न च वा ह्युपपद्यते ॥५५॥
paśyantyā darśanaṃ dṛṣṭe na ca vā hyupapadyate
— पश्यन्ती का ; — दर्शन ; — (विषय के) दृष्ट होने पर ; — और नहीं ; — अथवा ; — निश्चय ही ; — संगत होता है

चाहे (विषय के) दृष्ट होने पर हो, अथवा (कुछ भी दृष्ट न होने पर) — पश्यन्ती का 'दर्शन' किसी भी प्रकार संगत नहीं होता।